उदार भाईयों की कथा the Story of Generous Brothers


एक आदमी अपनी पत्नी के साथ रहता था। उन दिनों आदमी ही खेतों में काम करते, फसलें उगाते और पैसे कमाते थे। और जिनके लड़के होते थे, वे और ज्यादा ज़मीन पर काम कर सकते थे। उसके दो लड़के थे। वे दोनों मजबूत, जवान हो गये थे और अपने पिता के साथ कड़ी मेहनत करते थे। उन्होंने अपनी ज़मीन काफी बढ़ा ली और वे अमीर हो गये। जब वो आदमी काफी बूढ़ा हो गया तो उसने एक दिन अपने दोनों बेटों से कहा, ” मैं किसी भी समय मर सकता हूँ, तुम दोनों ये एक बात हमेशा बनाये रखना। मेरे मरने के बाद, तुम दोनों इस सारी ज़मीन की फसल को 50% पर ही बाँटना। इस बारे में कभी कोई चर्चा, विवाद या झगड़ा नहीं होना चाहिये।

फिर, वो बूढ़ा मर गया और उसके बेटों ने उसकी बात का खयाल रखा। उन दिनों, भारत में, और संसार के कई भागों में भी, ज़मीन बाँटने का रिवाज़ नहीं था। सिर्फ फसल बाँटी जाती थी, ज़मीन नहीं। तो, दोनों भाई पैदा हुई फसल को आपस में बराबर-बराबर बाँट लेते थे।

उनमें से एक की शादी हुई और उसके 5 बच्चे हुए। दूसरे ने कभी शादी नहीं की। पर फिर भी वे फसल को बराबर हिस्सों में ही बाँटते थे। एक दिन उस बिन शादी किये हुए भाई के दिमाग में कीड़ा घुसा। उसने सोचा, “मेरे भाई की पत्नी भी है और उन्हें 5 बच्चे भी हैं। मैं तो अकेला हूँ। फिर भी मैं 50% लेता हूँ और उसे भी 50% ही मिलता है। ये ठीक नहीं लगता। पर ये हमारे पिता की इच्छा थी। और मेरा भाई इतना स्वाभिमानी है कि अगर मैं उसको कुछ ज्यादा देने की कोशिश करूँगा तो वो नहीं लेगा। तो, मुझे कुछ और करना चाहिये। जब फसल कट गई और बँटवारा हो गया तो वो हर रात को अपने हिस्से में से अनाज की एक बोरी ले कर भाई के गोदाम में रख आता।

उधर, उसके भाई के सिर में भी वैसा ही कीड़ा घुसा और उसने सोचा, “मेरे 5 बच्चे बड़े हो रहे हैं और कुछ सालों में मेरे पास बहुत कुछ होगा। मेरे भाई के साथ कोई नहीं है। वो बाद में क्या करेगा? पर वो सिर्फ 50% लेता है और मैं भी उतना ही लेता हूँ। मैं अगर उसे ज्यादा देने की कोशिश करूँगा तो वो नहीं लेगा”। तो उसने भी हर रात को अपने हिस्से में से ले कर एक बोरी भाई के गोदाम में रखना शुरू किया। इस तरह रोज अनाज का लेन-देन चलता रहा और लंबे समय तक दोनों को इसका पता नहीं चला।

वे धीरे-धीरे बूढ़े हो रहे थे पर फिर भी यही करते रहे। एक दिन, रात को वे जब एक दूसरे के गोदाम में बोरी रख रहे थे तो आमने-सामने आ गये। दोनों ने एक दूसरे को देखा और अचानक उन्हें पता चला कि इस सारे समय में क्या हो रहा था! पर उन्होंने तेजी से एक दूसरे पर से अपनी आँख हटा ली और अपनी अपनी बोरी जहाँ रखनी थी, वहाँ रख आये और अपने-अपने घर जा कर सो गये। इसी तरह समय बीतता रहा और फिर वे बूढ़े हो कर मर गये।

बाद में, उस गाँव के लोग एक मंदिर बनाना चाहते थे और उसके लिये अच्छी जगह ढूँढ रहे थे। लंबी खोज के बाद उन्होंने तय किया कि मंदिर बनाने के लिये सबसे अच्छी जगह वो थी जहाँ ये दोनों भाई उस रात अपनी पीठ पर अनाज की बोरी लादे हुए मिले थे, और अपनी खुद की उदारता पर शर्मिंदा हुए थे। अगर आप इस तरह जीते हैं तो आप एक जीवंत मंदिर हैं। फिर आपके लिये बिना शर्तों के प्यार, सशर्त प्यार और ऐसी सब बातों का कोई मतलब नहीं है।


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